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पाचन पैक

980.00 784.00

पाचन के लिए सर्वश्रेष्ठ औषधियों का उपयोग:

पाचन रोगों के उपचार में सहायक

खुराक: पाचक – दोपहर और रात के भोजन के बाद 1 छोटा चम्मच; अम्लपित्तवटी – दोपहर और रात के भोजन के बाद 1 गोली; गैसोहर्ब – दोपहर और रात के भोजन के बाद 1 गोली; कबज – रात के भोजन के बाद और बिस्तर में जाने से पहले 1 छोटा चम्मच

पाचन की सर्वश्रेष्ठ औषधियों का परिचय:

आधुनिक युग की भागदौड़ वाली जीवनशैली में, हम अक्सर ज्यादा या ऊटपटांग खा लेते हैं और अस्वास्थ्यकर आहारचर्या का पालन करते हैं। वहीँ हमारी होड़ भरी कार्यशैली और सामाजिक जीवन लगातार तनाव में वृद्धि कर रहे हैं।

यह सब अक्सर हमें अल्सर,अति अम्लता (हाइपर एसिडिटी), गैसीयता, पेट फूलना और कभी-कभी कब्ज जैसे विभिन्न पाचन रोगों की चपेट में लाता है। शुक्र है कि इससे छुटकारा पाने के लिए डॉ वैद्य का पाचन पैक उपलब्ध है। पाचन के लिए सर्वश्रेष्ठ 4 औषधियों के मिश्रण के स्वरूप में यह स्वास्थ्य पैक एक महीने तक सेवन किए जाने के हिसाब से उपलब्ध है।

Ayurvedic medicine for Indigestion
1 × Pachak Churan (50 grams X 2)
300.00
Ayurvedic Medicine for Acidity
1 × Amlapittavati (24 pills X 3)
450.00
Ayurvedic Medicine for Gas
1 × Gasoherb (30 pills X 1)
150.00
Constipation Medicine
1 × Kabaj Churna (50 grams X 1)
80.00

आधुनिक युग की भागदौड़ वाली जीवनशैली में, हम अक्सर ज्यादा या ऊटपटांग खा लेते हैं और अस्वास्थ्यकर आहारचर्या का पालन करते हैं। वहीँ हमारी होड़ भरी कार्यशैली और सामाजिक जीवन लगातार तनाव में वृद्धि कर रहे हैं।

यह सब अक्सर हमें अल्सर,अति अम्लता (हाइपर एसिडिटी), गैसीयता, पेट फूलना और कभी-कभी कब्ज जैसे विभिन्न पाचन रोगों की चपेट में लाता है। शुक्र है कि इससे छुटकारा पाने के लिए डॉ वैद्य का पाचन पैक उपलब्ध है। पाचन के लिए सर्वश्रेष्ठ 4 औषधियों के मिश्रण के स्वरूप में यह स्वास्थ्य पैक एक महीने तक सेवन किए जाने के हिसाब से उपलब्ध है।

पाचक पाचन समस्या के लिए एक विशेष रूप से तैयार आयुर्वेदिक औषधि है। यह औषधि ‘पाचन अग्नि’ को उत्तेजित करती है, जिससे पोषक तत्वों का अच्छी तरह अवशोषण हो पाता है। बदहजमी, भूख न लगना, पेट फूलना, ऐसिडिटी या अन्य पाचन संबंधी विकारों से जूझ रहे लोगों के लिए यह आदर्श है, क्योंकि पाचक से तुरंत राहत मिलती है।

अम्लपित्त वटी पाचन संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए एक विश्वसनीय आयुर्वेदिक औषधि है, जिसका हमारी आंतों पर सुखद प्रभाव पड़ता है। यह हर्बल औषधि अम्लता (एसिडिटी), अति अमृता (हाइपर एसिडिटी), गैस्ट्राइटिस, क्रॉनिक पेप्टिक अल्सर जैसी विभिन्न बीमारियों से स्थायी राहत प्रदान करने के लिए जानी जाती है।

गैसोहर्ब पाचन के लिए एक आयुर्वेदिक औषधि है जो अतिरिक्त पाचन गैस को निष्कासित करने में मदद करती है, जिसके चलते आपको इस गैस से होनेवाली पीड़ा या जलन से राहत मिलती है। बच्चों और वयस्कों दोनों की जरूरतों को पूरा करने के अनुरूप तैयार, गैसोहर्ब गैस और पेट फूलने की अनचाही समस्या से तत्काल राहत प्रदान करती है।

कबज वास्तव में कब्ज के लिए एक आयुर्वेदिक औषधि है जो आंत्र आंदोलनों को उत्तेजित करती है और कब्ज के कारण होनेवाले दर्द और असुविधा से तत्काल राहत प्रदान करता है।

 

नोट : हम इन उत्पादों का उपयोग करने से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक के साथ परामर्श कर लेने की सलाह देते हैं, क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति और उसका शरीर अनूठा होता है। हमारे इन-हाउस चिकित्सक से नि: शुल्क परामर्श के लिए कृपया हमें +919820291850 पर कॉल करें या हमें care@drvaidyas.com पर ईमेल करें।

पाचक

10 वर्ष और उससे कम उम्र के लिए: दोपहर और रात के भोजन के बाद प्रतिदिन आधा छोटा चम्मच

10 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लिए: दोपहर और रात के भोजन के बाद प्रतिदिन 1 छोटा चम्मच

अम्लपित्तवटी

12 वर्ष और उससे अधिक आयु के लिए, नाश्ते और रात के खाने के बाद रोजाना 1 गोली

गैसोहर्ब

10-15 साल की आयु के लिए: दोपहर और रात के भोजन के बाद रोजाना आधा गोली दो बार

15 साल और उससे अधिक उम्र के लिए: दोपहर और रात के भोजन के बाद रोजाना दो बार 1 गोली।

कबज चूर्ण

गंभीर कब्ज के लिए (प्रति सप्ताह 1-2 से कम आंत्र आंदोलनों के मामले में) – रात को सोने से पहले 2 छोटा चम्मच

सामान्य कब्ज के लिए (प्रति सप्ताह 3 से कम आंत्र आंदोलनों के मामले में) – रात को सोने से पहले 1 छोटा चम्मच

10 साल और उससे अधिक आयु के लोगों लिए अनुशंसित

पाचक

सिंधलन

इसे सेंधा नमक या पहाड़ी नमक के रूप में भी जाना जाता है। यह मल को नरम कर शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। यह पाचन में सुधार करता है और आंतों और पेट से गैस को दूर करता है।

खड़ी शक्कर  

इसे रॉक कैंडी के नाम से भी जाना जाता है। यह हर्ब वजन को नियंत्रित करने के साथ-साथ पेट दर्द और किडनी स्टोन से छुटकारा पाने में मदद करती है।

पिप्पर

इसे बालिनीज पेपर भी कहा जाता है। पिप्पर इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है।

शाहजीरा

शाहजीरा या शाहीजीरा को कैरेवे सीड्स के नाम से भी जाना जाता है। इसका उपयोग सीने की जलन (हार्टबर्न),पेट फूलना, भूख न लगना और पेट और अंतडि़यों में उठनेवाली हल्की मरोड़ जैसी पाचन समस्याओं को दूर करने में किया जाता है। यह पेट को साफ करता है और गैस से राहत प्रदान करता है।

ताज

यह आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी सामान्य जीवन शक्ति को बढ़ाती है। यह पेट को साफ रखता है, दस्त को रोकता है, पाचन में सुधार करता है और पेट की मरोड़ से राहत देता है।

अमला

अमला को इंडियन गूसबेरी के रूप में भी जाना जाता है। अमला भोजन के अवशोषण को बढ़ाता है और विषैले तत्वों को बाहर निकाल देता है। इसे कब्ज से छुटकारा दिलाने और शरीर का कायाकल्प करने के लिए भी जाना जाता है।

सुंठ

सुंठ या सोंठ को सूखे अदरक के रूप में भी हम जानते हैं। सोंठ को पाचन को सुधारने और वजन प्रबंधन (वेट मैनेजमेंट) में सहायता प्रदान करनेवाले हर्ब के रूप में जाना जाता है।

 

अम्लपित्त वटी

अमला

अत्यधिक प्रभावी क्षारीय (अल्कलाइजर) आमला या आंवला जिसे इंडियन गूस्बेरी के नाम से भी जाना जाता है, मेटाबालिज्म को बढ़ावा देता है और अपने हाई फाइबर सामग्री के कारण पाचन को बढ़ावा देता है।

मुनक्का

शरीर को एनर्जी से भर देनेवाले मुनक्का में आयरन और मैग्नीशियम होता है और यह एसिडिटी को दूर भगाने के लिए जाना जाता है।

इलायची

मसाले के रूप में विख्यात इलायची पाचन तंत्र को मजबूत करने में मदद करती है।

ज्येष्ठिमधु

ज्येष्ठिमधु फेफड़ों के टोनर के रूप में कार्य करता है और क्रानिक जुकाम पैदा करने वाली एलर्जी से लड़ता है।

नागकेशर

स्वभाव में एंटी-पेप्टिक, नागकेशर को पाचन प्रक्रिया की सहायता करने में प्रभावी माना जाता है।

जायफल

इसे नटमेग के रूप में भी जाना जाता है। जायफल अपने एंटी-ऑक्सीडेंट गुणों के साथ-साथ गैसट्राइटिस और अपचन के इलाज में काफी असरदार माना जाता है।

खारिक

इसे छुहारा के रूप में भी जाना जाता है। अपने हाई फाइबर कंटेंट के चलते खारिक पाचन की प्रक्रिया में सहायक होता है।

 

गैसोहर्ब

सुंठ

सुंठ या सोंठ को सूखे अदरक के रूप में भी हम जानते हैं। सोंठ को पाचन को सुधारने और वजन प्रबंधन में सहायता प्रदान करनेवाली जड़ी-बूटी के रूप में जाना जाता है।

काली मिर्च

काली मिर्च पाचन में सुधार करती है और गैस्ट्रिक परेशानियों का इलाज करती है।

पेपरिमूल

पेपरिमूल पाचन को तेज करता है, जबकि शरीर के चयापचय में भी सुधार करता है।

बोडीअजमा

इसे अजवाइन के रूप में भी जाना जाता है। बोडीअजमा से गैस पर नियंत्रण, पेट फूलने, उल्टी और आंतों के परजीवी की रोकथाम जैसे विभिन्न पाचन संबंधी लाभ होते हैं।

चावक

यह जड़ी-बूटी पाचन रोगों को ठीक करने, भूख बढ़ाने और पेट के कृमि (कीड़े) को नष्ट करने के लिए जानी जाती है।

सज्जीखार

यह भूख को उत्तेजित करने के लिए जाना जाता है। यह सीने की जलन (हार्टबर्न) को रोकने में मदद करता है, पेट की गैस और पेट फूलने की परेशानी को कम करता है।

समर नमक

यह गैस और पेट फूलना जैसे पाचन विकार सहित विभिन्न बीमारियों के इलाज में मदद करता है।

सैटिरिक एसिड

यह आमतौर पर मसालेदार, नमकीन और तैलीय खाद्य पदार्थों के सेवन के चलते होनेवाली अम्लता (एसिडिटी) और सीने की जलन (हार्टबर्न) से राहत प्रदान करता है।

 

कबज

सोनामुखी

इसे भारतीय सनाय के रूप में भी जाना जाता है। यह एक प्रमुख रेचक के रूप में कार्य करता है और शुद्ध गुण प्रदर्शित करता है। यह आंतों के पेरिस्टाल्टिक मूवमेंट को बढ़ाता है और इस तरह बाउअल मूवमेंट (आंत्र आंदोलन) को गति देता है।

नासोतर

यह जड़ी बूटी वात और पित्त दोषों को संतुलित करने के लिए जानी जाती है। यह एक रेचक के रूप में कार्य करती है और कब्ज से तुरंत राहत प्रदान करती है।

हिमज

इसे बाल हरड या काली हरड के नाम से भी जाना जाता है। हिमज कड़े मल को नरम बनाकर उसे आसानी से शरीर से बाहर निकालने में कारगर है।

सिंधलन

इसे सेंधा नमक या पहाड़ी नमक के रूप में भी जाना जाता है। यह पाचन तंत्र के ऊतकों के आसपास पानी को रोकता है। इसके अलावा यह मल को नरम करने में सहायक है और उसके आसानी से पारित होने में मदद करता है।

सुंठ

सुंठ या सोंठ दरअसल सूखे अदरक को कहते हैं। सोंठ को छाती और गैस्ट्रिक पीड़ा से छुटकारा दिलाने में बहुत कारगर माना जाता है। यह पाचन को सुधारता है और वजन के प्रबंधन में सहायता करता है।

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