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अस्थमा पैक

1,130.00 1,073.50

अस्थमा के लिए सर्वश्रेष्ठ औषधियों का उपयोग:

ब्रोन्कियल अस्थमा (श्वसनी दमा) के उपचार में सहायक

खुराक: हर्बोफिट – नाश्ते से पहले प्रतिदिन एक कैप्सूल; हफ-एन-कफ सिरप – वयस्कों के लिए दिन में तीन बार २ छोटा चम्मच; ब्रोंकोहर्ब – 1 छोटा चम्मच दिन में 3 बार; एलर्जिक – भोजन के बाद दिन में तीन बार 1 गोली

अस्थमा के सर्वश्रेष्ठ उपचार का परिचय:

डॉ वैद्य की अस्थमा किट अस्थमा (दमा) के लिए सर्वश्रेष्ठ उपचार है, जिसमें अन्य श्वसन रोगों के साथ ब्रोन्कियल अस्थमा के प्रभावी उपचार के लिए ब्रोंकोहर्ब पाउडर और हर्बोकॉफ सिरप शामिल है। यह खांसी और जुकाम से स्थायी राहत भी प्रदान करता है। हमारे शरीर की प्रतिरक्षा और ऊर्जा वर्द्धक हर्बोफिट और प्रभावी एंटी-एलर्जिक दवाओं, एलर्जिक पिल्स के मिश्रण वाले अस्थमा चिकित्सा के इस पैक को 1 महीने तक उपयोग किए जाने के हिसाब से तैयार किया गया है और यह अस्थमा के खिलाफ अल्पकालिक और दीर्घकालिक राहत प्रदान करता है।

ayurvedic medicine
1 × HERBOfit (30 capsules X 1)
180.00
asthma medicine
1 × Bronkoherb (50 grams X 2)
300.00
ayurvedic cough syrup
1 × Huff N Kuff Syrup (100ml X 2)
200.00
allergy medicine
1 × Allergic (24 pills X 3)
450.00

डॉ वैद्य की अस्थमा किट अस्थमा (दमा) के लिए सर्वश्रेष्ठ उपचार है, जिसमें अन्य श्वसन रोगों के साथ ब्रोन्कियल अस्थमा के प्रभावी उपचार के लिए ब्रोंकोहर्ब पाउडर और हर्बोकॉफ सिरप शामिल है। यह खांसी और जुकाम से स्थायी राहत भी प्रदान करता है। हमारे शरीर की प्रतिरक्षा और ऊर्जा वर्द्धक हर्बोफिट और प्रभावी एंटी-एलर्जिक दवाओं, एलर्जिक पिल्स के मिश्रण वाले अस्थमा चिकित्सा के इस पैक को 1 महीने तक उपयोग किए जाने के हिसाब से तैयार किया गया है और यह अस्थमा के खिलाफ अल्पकालिक और दीर्घकालिक राहत प्रदान करता है।

हर्बोफिट परंपरागत च्यवनप्राश में इस्तेमाल किए जानेवाले 21 सक्रिय घटकों का केंद्रित अर्क है जो कैप्सूल के रूप में उपयोग के लिए उपलब्ध है। प्रतिरक्षा के लिए सर्वश्रेष्ठ च्यवनप्राश के सभी फायदों के साथ इस कैप्सूल में निहित जड़ी-बूटियां शरीर में प्रतिरोधक क्षमता का निर्माण कर बीमारियों और विकारों को रोकने में मदद करती हैं। यह ऊतकों को भी पुनर्जीवन प्रदान करता है, प्रतिरक्षा का निर्माण करता है, मांसपेशियों को मजबूत बनाता है, पाचन में मदद करता है, ऊर्जा को बढ़ाता है और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है। यह ब्रोंकाइटिस और अस्थमा जैसी पुरानी बीमारियों में प्रभावी ढंग से राहत देता है।

ब्रोंकोहर्ब वास्तव में अस्थमा के लिए सर्वश्रेष्ठ दवा है, जो श्वसन संबंधित बीमारियों से त्वरित और स्थायी राहत प्रदान करता है। आयुर्वेद में सबसे भरोसेमंद अस्थमा उपचारों में से एक, ब्रोंकोहर्ब ब्रोन्कियल अस्थमा (श्वसनी दमा) के साथ-साथ क्रोनिक ब्रोंकाइटिस के लक्षणों को खत्म करने में मदद करता है।

हफ-एन-कफ सिरप एक आयुर्वेदिक कफ सिरप है जो खांसी और गले के संक्रमण का इलाज करने में मदद करता है। प्रमुख जड़ी-बूटियों से बनी यह दवा आदर्श रूप से बलगम के साथ लगातार खांसी से राहत प्रदान करने के लिए तैयार की जाती है।

एलर्जिक विशेष रूप से तैयार टैबलेट है जिसका उद्देश्य आपको धीरे-धीरे धूल, पराग अनाज, आदि जैसे विभिन्न एलर्जी कारक तत्वों (एलर्जन) के प्रति असंवेदनशील बनाकर सांस लेने में होनेवाली तकलीफ से छुटकारा दिलाना है। जहां यह औषधि स्पष्ट श्वास लेने में सक्षम बनाती है, वहीँ यह भी सुनिश्चित करती है कि खांसी, जुकाम, बंद नाक, साइनस और गले की जलन जैसे ऊपरी फेफड़ों से संबंधित समस्याओं से भी छुटकारा मिले।

 

नोट : हम इन उत्पादों का उपयोग करने से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक के साथ परामर्श कर लेने की सलाह देते हैं, क्योंकि प्रत्येक शरीर और व्यक्ति निराला होता है। हमारे यहां उपलब्ध चिकित्सक से नि:शुल्क परामर्श के लिए कृपया हमें +919820291850 पर कॉल करें या हमें care@drvaidyas.com पर ईमेल करें।

हर्बोफिट

10 साल और उससे अधिक उम्र के लिए : नाश्ते के बाद या एक गिलास दूध के साथ प्रतिदिन एक कैप्सूल।

ब्रोंकोहर्ब

15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लिए: 1 छोटा चम्मच, दिन में तीन बार

10-15 वर्ष तक की उम्र के लिए:: आधा छोटा चम्मच, दिन में तीन बार

हफ-एन-कफ

वयस्कों के लिए: 2 छोटा चम्मच – दिन में तीन बार

बच्चों के लिए: 1 छोटा चम्मच – दिन में तीन बार

शिशुओं के लिए: आधा छोटा चम्मच – दिन में तीन बार

एलर्जिक

10-15 साल की उम्र के लिए : नाश्ते के बाद 1 गोली

15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लिए : भोजन के बाद 1 गोली दिन में तीन बार

 

नोट: ब्रोंकोहर्ब, हफ-एन-कफ सिरप और एलर्जिक मधुमेह के रोगियों के लिए अनुशंसित नहीं है

डॉ वैद्य के अस्थमा पैक में निहित औषधियों में निम्नलिखित घटक शामिल हैं –

हर्बोफिट

अमला घन

इंडियन गूस्बेरी (करौंदा) के रूप में विख्यात आंवला या अमला में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में होता है। यह मस्तिष्क की कार्यक्षमता को पोषण देता है, भोजन के अवशोषण को बढ़ाता है, शरीर को शीतल रखता है और शरीर से विषाक्त पदार्थ (टाक्सिन) को बाहर फेंक देता है।

इलाइची घन

इलायची को विभिन्न प्रकार के संक्रमणों से लड़ने और उनकी रोकथाम करने के लिए जाना जाता है। यह एक श्रेष्ठ अवसादरोधी (एंटी-डिप्रेसंट) भी है।

लौंग घन

हर्बोफिट में लौंग के रोगाणुरोधक (एंटीसेप्टिक) गुणों का प्रयोग किया जाता है जो खांसी और जुकाम के इलाज में मदद करते हैं।

केसर पाउडर

केसर शरीर को बीमारियों से लड़ने में सक्षम बनाता है, कोशिकाओं के गठन और मरम्मत में सहायता करता है, रक्तचाप को बनाए रखने में मदद करता है और हृदय रोगों को दूर रखता है।

जायफल घन

जायफल या नटमेग को चिंता और तनाव कम करने के लिए जाना जाता है और यह पाचन समस्याओं और मासिक धर्म के दौरान होनेवाली ऐंठन से छुटकारा दिलाने में मददगार है।

जवंतरी घन

जवंतरी (जावित्री) अपने अवसादरोधी (एंटी-डिप्रेसंट) गुणों के साथ-साथ जीवाणुरोधी खूबियों के लिए प्रसिद्द है। यह दौरे को नियंत्रित करने में मदद करती है और मिर्गी को रोकती है।

ईलचा घन

यह आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी आंतों और उदर ग्रंथियों (गैस्ट्रिक ग्लैंड्स) को जरूरी रसों का रिसाव करने के लिए उत्तेजित करती है। यह सीने की जलन (हार्टबर्न) और पेट की ऐंठन को ठीक करने में सहायक है।

नागरमोथा घन

इसे नटग्रास के रूप में भी जाना जाता है, नागरमोथा त्वचा की बीमारियों को ठीक करने में मदद करता है। यह मूत्रवर्धक के रूप में भी कार्य करता है और यकृत (लीवर) और फेफड़ों की बीमारियों को रोकने में मदद करता है।

जटामांसी घन

जटामांसी एक प्राकृतिक मस्तिष्क शामक (नर्वाइन) टॉनिक और एक स्मृति वर्धक है, जिसका एक शांतिदायक प्रभाव पड़ता है।

ताज घन

ताज सामान्य जीवन शक्ति बढ़ाता है। यह पूरे शरीर में गरमाहट लाता है और एनर्जी प्रदान करता है। पेट को साफ रखता है, दस्त को रोकता है, पाचन में सुधार करता है और पेट की मरोड़ से राहत देता है।

तेजपत्र घन

तेजपत्र घन आहार संबंधी सहायता (डाइएटरी सपोर्ट) और अग्नाशयी (पैंक्रिएटिक) टॉनिक के रूप में काम करता है। यह श्वसन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखता है और विभिन्न पर्यावरणीय रोगजनकों (पैथजन) से बचाए रखने के लिए प्रतिरोधक क्षमता को सक्षम बनाने में मदद करता है।

शाहीजीरा घन

शाहीजीरा का उपयोग सीने की जलन (हार्टबर्न), पेट फूलना, गैस, भूख न लगना और पेट और आंतों में मरोड़ जैसी पाचन समस्याओं से छुटकारा पाने में किया जाता है।

धनिया घन

धनिया एक्जिमा, खुजली, चकत्ते, और सूजन जैसे विभिन्न त्वचा रोगों को ठीक करने में काफी असरदार है। यह मुंह के अल्सर और घावों का इलाज करने में भी मदद करता है।

तालिसपत्र घन

तालिसपत्र एक प्रमुख आयुर्वेदिक हर्ब है जिसका श्वासनली और फेफड़ों पर प्रदाहनाशी (एंटी-इन्फ्लैमटॉरी) और ब्रोंकोडाइलेटरी असर होता है।

कपूरकचली घन

कपूरकचली घन को मुख्य रूप से एक एंटी-अस्थमैटिक एजेंट के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसका उपयोग ब्रोंकाइटिस, दर्द, मतली (उबकाई), प्रदाह और हिचकी का इलाज करने के लिए भी किया जाता है।

गुलाब घन

गुलाब घन त्वचा के नीचे केशिकाओं की सूजन को कम कर देता है, गालब्लैडर (पित्ताशय की थैली) और लीवर को साफ करता है और पित्त स्राव (बाइल सिक्रीशन) को बेहतर बनाने के लिए जाना जाता है।

मस्तकी घन

इस आयुर्वेदिक हर्ब का इस्तेमाल गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बीमारियों के इलाज में किया जाता है। बैक्टीरियल और फंगल इंफेक्शन के साथ हाई ब्लड प्रेशर,हृदय रोग, और पेप्टिक अल्सर के इलाज में इसका उपयोग होता है।

तगर घन  

यह जड़ी बूटी जोड़ों (रुमैटिक ज्वाइंट्स) में सूजन और दर्द के इलाज में मदद करती है। यह अधिक संकुचित मांसपेशियों को ढीला (रिलैक्स) करती है और इस प्रकार यह कंधे और गर्दन के तनाव में राहत देने में कारगर है।

अभ्रक भस्म

अभ्रक भस्म एक बेहतरीन कोशिकीय पुनरुत्पादक ( सेलुलर रिजेनरेटर) और तंत्रिका (नर्व) टॉनिक है। इसका उपयोग एनीमिया के साथ कई श्वसन पथ (रेस्परटॉरी ट्रैक्ट) संक्रमण के इलाज के लिए किया जाता है।

निर्भिशी घन

निर्भिशी घन वात, पित्त और कफ दमनकारी है। यह सूजन को कम करने में कारगर है। यह किसी भी तरह के इंफेक्शन को ठीक करने के साथ-साथ उसमें होनेवाले दर्द से राहत दिलाने में भी मदद करता है।

 

ब्रोंकोहर्ब

खड़ी शक्कर

इसे रॉक कैंडी भी कहा जाता है, पाल्मायरा ताड़ के अर्क से प्राप्त यह जड़ी-बूटी खांसी और जुकाम के साथ ही गले की जलन से छुटकारा दिलाती है।

बांस कपूर

इसे कंटमय बांस के रूप में भी जाना जाता है, यह जड़ी-बूटी पानी के उचित अवशोषण में मदद करके शरीर में निर्जलीकरण को रोकती है।

इलाइची

इलायची को ‘मसालों के राजा’ के रूप में जाना जाता है, इलाइची फेफड़ों के संकुलन और अन्य फुफ्फुसीय बीमारियों में राहत प्रदान करने में बेहद कारगर है।

ताज

ताज एक प्रमुख आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जो उच्च रक्तचाप, मधुमेह,  स्तंभन दोष, पेट फूलना और गुर्दे (किडनी) विकारों का इलाज करने में मदद करती है।

ज्येष्ठिमधु

ज्येष्ठिमधु सबसे शक्तिशाली और सबसे पुराने प्राकृतिक औषधीय उपचारों में से एक है। ज्येष्ठिमधु फेफड़े के टोनर के रूप में कार्य करती है और क्रोनिक कोल्ड (पुरानी सर्दी) पैदा करने वाली एलर्जी से लड़ती है।

लौंग

ब्रोंकोहेर्ब में लवांग या लौंग का उपयोग इसके एंटीसेप्टिक गुणों के लिए किया जाता है, जो खांसी और जुकाम के इलाज में सहायक हैं।

लिंडिपाइपर

इसे पिप्पली (लॉन्ग पाइपर) के रूप में भी जाना जाता है, यह जड़ी-बूटी शरीर में ऑक्सीजन के प्रवाह में सुधार करने में मदद करती है।

कपूर

कपूर को प्रदाहरोधी (एंटी-इन्फ्लामेटरी) गुणों से युक्त प्रमुख जड़ी-बूटी के रूप में जाना जाता है।

वलो

यह प्रमुख आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी परिसंचरण तंत्र (सर्कुलेटरी सिस्टम) और तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) में प्रदाह (इन्फ्लामेशन) से राहत प्रदान करती है।

जटामांसी

इसे स्पाइकनार्ड ( बालछड़) के रूप में भी जाना जाता है। जटामांसी एक प्राकृतिक मस्तिष्क शामक (नर्वाइन) टॉनिक और एक स्मृति वर्धक है, जिसका एक शांतिदायक प्रभाव पड़ता है।

शाहजीरा

शाहजीरा (शाहीजीरा) का उपयोग सीने की जलन (हार्टबर्न), पेट फूलना, गैस, भूख न लगना और पेट और आंतों में मरोड़ जैसी पाचन समस्याओं से छुटकारा पाने में किया जाता है।

जायफल

जायफल या नटमेग को चिंता और तनाव कम करने के लिए जाना जाता है और यह पाचन समस्याओं और मासिक धर्म के दौरान होनेवाली ऐंठन से छुटकारा दिलाने में मदद करता है।

सोंठ

इसे सूखे अदरक के तौर पर भी जाना जाता है, यह सर्दी-खांसी से त्वरित राहत प्रदान करता है।

तगर

यह जड़ी बूटी जोड़ों (रुमैटिक ज्वाइंट्स) में सूजन और दर्द से राहत प्रदान करती है। यह अधिक संकुचित मांसपेशियों को आराम प्रदान करती है और इस प्रकार यह कंधे और गर्दन के तनाव में राहत देने में कारगर है।

नागकेसर

प्रकृति में अम्लतारोधी (एंटी-पेप्टिक) नागकेसर पाचन प्रक्रिया की सहायता करने में प्रभावी माना जाता है।

कमल

कमल एक बेहतरीन शीतलक के रूप में काम करता है।

कंकोल

इसे पुच्छल काली मिर्च के रूप में भी जाना जाता है, कंकोल अतिरिक्त श्लेष्म का स्राव कर श्वसन मार्ग को साफ करता है, इस प्रकार यह आपको सामान्य रूप से सांस लेने में मदद करता है।

अभ्रक भस्म

अभ्रक भस्म एक बेहतरीन कोशिकीय पुनरुत्पादक ( सेलुलर रिजेनरेटर) और तंत्रिका (नर्व) टॉनिक है, जिसका उपयोग एनीमिया के साथ कई श्वसन पथ (रेस्परटॉरी ट्रैक्ट) संक्रमण के इलाज के लिए किया जाता है।

स्वासकुठर पाउडर

स्वासकुठर का उपयोग खांसी, जुकाम, ब्रोंकाइटिस और अस्थमा जैसे श्वसन रोगों के उपचार में किया जाता है। यह कफ को कम करने में मदद करता है और सामान्य श्वसन को बरकरार करता है।

 

हफ-एन-कफ

ज्येष्ठिमधु घन

ज्येष्ठिमधु सबसे शक्तिशाली और सबसे पुराने प्राकृतिक औषधीय उपचारों में से एक है। ज्येष्ठिमधु फेफड़े टोनर के रूप में कार्य करता है और जीर्ण जुकाम को पैदा करनेवाली एलर्जी से लड़ता है।

अडूसा पंचांग घन

अडूसा (वासा) को आमतौर पर इसे मालाबार नट के रूप में जाना जाता है, यह जड़ी-बूटी खांसी, सर्दी, और अस्थमा को ठीक करने के लिए उपयोगी है।

ब्राह्मी घन

इसे बाकोपा के रूप में भी जाना जाता है। ब्राह्मी तनाव से छुटकारा दिलाने में मदद करती है इसलिए विभिन्न बीमारियों के इलाज के रूप में इसका उपयोग किया जाता है।

तुलसी घन

इस भारतीय जड़ी-बूटी को पवित्र तुलसी के रूप में सम्मान प्राप्त है। इसे इसके चिकित्सीय, एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल प्रभाव के साथ-साथ अनेक प्रकार के औषधीय लाभ के लिए जाना जाता है। यह श्वसन मार्ग में सुधार करने में सहायक है और बुखार और सिरदर्द से राहत प्रदान करता है।

कपूर

कपूर वातशूल (नयूराल्जिया) और आमवात (रूमटिज़म) के चलते होनेवाले दर्द और सूजन को कम करने में मदद करता है।

 

एलर्जिक

सितोपलादि

इसे खड़ी शक्कर के रूप में भी जाना जाता है। सितोपलादि अपने एंटीहिस्टामिनिक गुणों के लिए प्रसिद्द है। यह ऊपरी श्वसन संकुलन के साथ-साथ निर्दोष तरीके से ब्रोन्कियल समस्याओं के इलाज में मदद करता है।

बैम्बू शूट

इसे लोकप्रिय रूप से बांस कपूर कहा जाता है। यह बांस की विभिन्न प्रजातियों की शाखाओं का खाद्यग्राही हिस्सा होता है। कई एशियाई व्यंजनों को तैयार करने में इसका प्रयोग किया जाता है, यह पाचन में सहायता करता है।

बालिनीस पीपर

इसे पिपर भी कहा जाता है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए जाना जाता है। यह एलर्जिक के अन्य घटकों के असर को भी बढ़ा देता है।

दालचीनी

बोलचाल की भाषा में इसे तेज के रूप में जाना जाता है। दालचीनी में कई एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं और यह संक्रमण से लड़ने में मदद करता है।

इलाइची

यह मसाला पाचन तंत्र को मजबूत करने में मदद करता है।

ज्येष्ठिमधु

ज्येष्ठिमधु सबसे शक्तिशाली और सबसे पुराने प्राकृतिक औषधीय उपचारों में से एक है। ज्येष्ठिमधु फेफड़े के टोनर के रूप में कार्य करती है और क्रोनिक कोल्ड (पुरानी सर्दी) पैदा करने वाली एलर्जी से लड़ती है।

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